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अहिल्याबाई होल्कर ( Ahilyabai Holkar) -2

पुण्यश्लोका लोकमाता अहिल्यादेवी होलकर-2:- केवल अपने राज्य में ही नहीं, अपितु सम्पूर्ण देश के "मंदिरों की पूजन-व्यवस्था और उनके आर्थिक प्रबंधन" पर भी उन्होंने विशेष ध्यान दिया। बद्रीनाथ से रामेश्वरम तक और द्वारिका से लेकर पुरी तक "विधर्मी आक्रमणकारियों द्वारा क्षतिग्रस्त मंदिरों का उन्होंने पुनर्निर्माण" करवाया।  प्राचीन काल से चलती आयी और आक्रमण काल में "खंडित हुई तीर्थयात्राओं में उनके कामों से नवीन चेतना आयी।" "इन वृहद कार्यों के कारण ही उन्हें 'पुण्यश्लोक' की उपाधि मिली। संपूर्ण भारतवर्ष में फैले हुए इन पवित्र स्थानों का विकास वास्तव में उनकी राष्ट्रीय दृष्टि का परिचायक है।" पुण्यश्लोका देवी अहिल्याबाई की जयंती के वर्ष के पावन अवसर पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन् करते हुए समस्त सनातन समाज बंधु-भगिनी इस पर्व पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में मनोयोग से सहभाग करें। उनके दिखाये गए सादगी, चारित्र्य, धर्मनिष्ठा और राष्ट्रीय स्वाभिमान के मार्ग पर अग्रसर होना ही उन्हें सच्ची श्रध्दांजलि होगी।

अहिल्याबाई होल्कर - Ahilyabai Holkar

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अहिल्या बाई की कहानी(Ahilya Bai Story):- पुण्यश्लोका लोकमाता अहल्यादेवी होलकर-1 31 मई, 2024 से अहल्यादेवी होलकर का '300 वाँ' जयंती वर्ष प्रारंभ हो गया है। उनका जीवन भारतीय इतिहास का एक गौरवशाली स्वर्णिम पर्व है। ग्रामीण पृष्ठभूमि वाले सामान्य परिवार की बालिका से एक असाधारण शासनकर्ता तक की उनकी जीवनयात्रा आज भी प्रेरणा का महान स्रोत है।  वे कर्तृत्व परायण, सादगी, धर्म के प्रति समर्पण, प्रशासनिक कुशलता, दूरदृष्टि एवं उज्वल राष्ट्रीय चारित्र्य का अद्वितीय आदर्श थीं। 'श्री शंकर आज्ञेवरून' (श्री शंकर जी की आज्ञानुसार) *इस राजमुद्रा से चलने वाला उनका शासन हमेशा भगवान् शंकर के प्रतिनिधि के रूप में ही काम करता रहा....।*  उनका लोक कल्याणकारी शासन भूमिहीन किसानों, भीलों जैसे जनजाति समूहों तथा विधवाओं के हितों की रक्षा करनेवाला एक आदर्श शासन था।  समाजसुधार, कृषिसुधार, जल प्रबंधन, पर्यावरण रक्षा, जनकल्याण और शिक्षा के प्रति समर्पित होने के साथ साथ उनका शासन न्यायप्रिय भी था।   *समाज के सभी वर्गों का सम्मान, सुरक्षा, प्रगति के अवसर देने वाली समरसता की दृष्टि उनके प्रशासन का आधार ...